ईमानदारी का फल

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एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत मेहनती था लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। फिर भी रामू हमेशा सच बोलता और ईमानदारी से अपना काम करता था।

एक दिन रामू अपने खेत में हल चला रहा था। तभी उसकी कुदाल मिट्टी में किसी सख्त चीज़ से टकराई। जब उसने खोदकर देखा तो वहाँ सोने के सिक्कों से भरा एक पुराना घड़ा निकला। रामू यह देखकर हैरान रह गया। वह चाहता तो चुपचाप उन सिक्कों को अपने पास रख सकता था, लेकिन उसका मन इसकी इजाजत नहीं दे रहा था।

रामू जानता था कि यह घड़ा किसी और का हो सकता है। वह तुरंत गाँव के मुखिया के पास गया और सारी बात सच-सच बता दी। मुखिया ने पूरे गाँव वालों को बुलाया और घड़े के बारे में पूछा, लेकिन किसी ने भी उस पर अपना दावा नहीं किया।

रामू की ईमानदारी से प्रभावित होकर मुखिया ने फैसला किया कि यह धन रामू को ही दिया जाए। साथ ही राजा तक यह बात पहुँची। राजा ने रामू को गाँव का सबसे ईमानदार व्यक्ति घोषित किया और उसे सम्मान के साथ-साथ अतिरिक्त इनाम भी दिया।

उस दिन के बाद रामू का जीवन बदल गया, लेकिन उसकी ईमानदारी वैसी ही बनी रही।


🌟 कहानी से सीख

ईमानदारी और सच्चाई का फल हमेशा मीठा होता है। जो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ता अपनाता है, उसे अंततः सफलता और सम्मान दोनों मिलते हैं।

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